Published : Jun 20, 2026 07:42 pm IST, Updated : Jun 20, 2026 07:42 pm IST
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ओडिशा के मयूरभंज जिले के पहाड़पुर गांव में शनिवार को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साथ पहुंचे। इस दौरान दोनों नेताओं ने आदिवासी परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की और स्थानीय लोगों से संवाद किया। यह दौरा धार्मिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक गतिविधियों से भरपूर रहा, जिसमें गांव को विशेष रूप से सजाया गया था। बता दें कि आज 20 जून को राष्ट्रपति मुर्मू का जन्मदिन भी है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहाड़पुर आगमन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच और मीडिया की नजरों से दूर हुआ। गांव में पहले से मौजूद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका स्वागत किया। स्थानीय लोगों ने ढोल-नगाड़ों, पुष्प वर्षा और पारंपरिक आदिवासी नृत्य के साथ दोनों नेताओं का स्वागत किया। पूरे गांव में उत्साह का माहौल था और लोगों ने इस पल को ऐतिहासिक बताया।
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दोनों नेताओं ने सबसे पहले गोसानी पीठ का दौरा किया, जिसे आदिवासी परंपरा में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसके बाद वे पैदल चलकर संथाली और हो जाहेरा स्थलों पर पहुंचे। यहां उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की और पौधरोपण भी किया। इस दौरान आदिवासी संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी दिया गया।
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जाहेरा स्थलों में प्रवेश से पहले राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित सुरक्षा कर्मियों को पारंपरिक संथाली वस्त्र भेंट किए गए। यह परंपरा आदिवासी रीति-रिवाजों का हिस्सा है। इन पवित्र उपवनों में आदिवासी देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, जबकि गोसानी पीठ में पूर्वजों के लिए प्रार्थना की जाती है। इस पूरे आयोजन ने आदिवासी संस्कृति की गहराई को उजागर किया।
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संथाली भाषा की विद्वान दमयंती बेसरा ने बताया कि, 'जाहेरा वे पवित्र उपवन हैं, जहां आदिवासी देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, जबकि गोसानी में पूर्वजों के लिए प्रार्थना की जाती है। यह ओडिशा के आदिवासियों के लिए एक अविस्मरणीय दिन है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों ने आदिवासी उपवनों में पूजा की।'
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इसके बाद दोनों नेता उस स्कूल में पहुंचे जिसकी स्थापना राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने दिवंगत पति श्याम चरण मुर्मू और अपने दो बेटों लक्ष्मण और सिपुन की स्मृति में की थी। उन्होंने श्याम चरण मुर्मू और दोनों बेटों की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर राष्ट्रपति के निजी जीवन की कठिनाइयों और उनके संकल्प की चर्चा भी हुई।
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प्रधानमंत्री मोदी ने भावुक संदेश में कहा, 'यह सम्मान की बात है कि मैं राष्ट्रपति के साथ पहाड़पुर में हूं, जो उनका जन्मस्थान है। उनका जीवन और कार्य प्रेरणादायक है। मैं उनके स्वस्थ और लंबे जीवन की कामना करता हूं।'
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि व्यक्तिगत त्रासदियों के बावजूद राष्ट्रपति का समर्पण प्रेरणा देता है। बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को साल 2009 से 2014 के बीच अपने दोनों बेटों और पति को खोने का असहनीय दुख झेलना पड़ा था। महज 4 साल के अंतराल में उनके परिवार में तीन लोगों की असामयिक मृत्यु हो गई, जिसने उन्हें बुरी तरह तोड़ दिया था।
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मोदी ने एक अन्य संदेश में कहा, 'मैं पहाड़पुर गांव के स्कूल में आया, जहां राष्ट्रपति शिक्षा ढांचे को बेहतर बनाने और युवाओं को अवसर देने में अग्रणी रही हैं। यहां के बच्चों के लिए बेहतर भविष्य की दिशा में यह प्रयास सराहनीय है।' उन्होंने छात्रों से बातचीत भी की और उनके प्रयासों की सराहना की।
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स्किल डेवलपमेंट सेंटर के दौरे पर प्रधानमंत्री ने कहा, 'यह देखकर खुशी होती है कि राष्ट्रपति इस क्षेत्र पर ध्यान दे रही हैं और गांव के विकास को गति दे रही हैं। यहां के युवा ऐसे कौशल सीख रहे हैं जो उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करेंगे।' यह केंद्र रोजगार और प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
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प्रधानमंत्री ने संथाली और हो जाहेरा में पूजा करते हुए कहा, 'हमने इन पवित्र उपवनों में पूजा की, जो प्रकृति और आदिवासी परंपराओं के गहरे संबंध को दर्शाते हैं। ये परंपराएं भारत की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा हैं और हम इन्हें आगे भी संरक्षित करेंगे।'
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गोसानी पीठ के दौरे पर उन्होंने कहा, 'गोसानी पीठ आदिवासी संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।' इस दौरान दोनों नेताओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की और क्षेत्रीय संस्कृति के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
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इस अवसर पर ओडिशा में 47,600 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का संयुक्त रूप से शिलान्यास और लोकार्पण किया गया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना, कनेक्टिविटी सुधारना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
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इन परियोजनाओं में 600 मेगावाट की ऊपरी इंद्रावती पंप भंडारण परियोजना, आईबी ताप विद्युत संयंत्र, कोल गैसीफिकेशन परियोजना, काठजोड़ी नदी पर पुल, बौध अस्पताल, रेलवे परियोजनाएं और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े कार्य शामिल हैं। साथ ही खेल, स्वास्थ्य और कौशल विकास से जुड़ी योजनाएं भी शुरू की गईं।